हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.35.11

मंडल 10 → सूक्त 35 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 35
त आ॑दित्या॒ आ ग॑ता स॒र्वता॑तये वृ॒धे नो॑ य॒ज्ञम॑वता सजोषसः । बृह॒स्पतिं॑ पू॒षण॑म॒श्विना॒ भगं॑ स्व॒स्त्य१॒॑ग्निं स॑मिधा॒नमी॑महे ॥ (११)
हे प्रसिद्ध आदित्यो! तुम हमारे यज्ञ के लिए आओ एवं हमारे कल्याण के लिए संयत होकर यज्ञ में बैठो. हम बृहस्पति, पूषा, अश्विनीकुमारों, भग एवं प्रज्वलित अग्नि से कल्याण की याचना करते हैं. (११)
O famous Adityas! You come for our yajna and sit in the yajna, restrained for our welfare. We beg for welfare from Jupiter, Pusha, Ashwinikumaras, Bhaga and the ignited agni. (11)