हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.35.12

मंडल 10 → सूक्त 35 → श्लोक 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 35
तन्नो॑ देवा यच्छत सुप्रवाच॒नं छ॒र्दिरा॑दित्याः सु॒भरं॑ नृ॒पाय्य॑म् । पश्वे॑ तो॒काय॒ तन॑याय जी॒वसे॑ स्व॒स्त्य१॒॑ग्निं स॑मिधा॒नमी॑महे ॥ (१२)
हे आदित्य देवो! तुम अपना यज्ञ पूर्ण करो एवं हमें मानवों की रक्षा करने वाला मनपसंद घर दो. हम प्रज्वलित अग्नि से अपने पशुओं, संतान एवं जीवन के विषय में कल्याण की याचना करते हैं. (१२)
Hey Aditya Devo! You complete your yajna and give us the favorite house to protect human beings. We ask for the welfare of our animals, children and life from the ignited agni. (12)