ऋग्वेद (मंडल 10)
य ईशि॑रे॒ भुव॑नस्य॒ प्रचे॑तसो॒ विश्व॑स्य स्था॒तुर्जग॑तश्च॒ मन्त॑वः । ते नः॑ कृ॒तादकृ॑ता॒देन॑स॒स्पर्य॒द्या दे॑वासः पिपृता स्व॒स्तये॑ ॥ (८)
उत्तम ज्ञान वाले एवं सर्वज्ञ देव समस्त जंगम लोक के स्वामी हैं. हे देवो! तुम हमें कृत अथवा अकृत पाप से बचाकर आज हमारे कल्याण को बढ़ाओ. (८)
The god of good knowledge and omniscient is the master of all the movable worlds. O God! You increase our welfare today by saving us from committed or uncratic sin. (8)