ऋग्वेद (मंडल 10)
प॒रा॒वतो॒ ये दिधि॑षन्त॒ आप्यं॒ मनु॑प्रीतासो॒ जनि॑मा वि॒वस्व॑तः । य॒याते॒र्ये न॑हु॒ष्य॑स्य ब॒र्हिषि॑ दे॒वा आस॑ते॒ ते अधि॑ ब्रुवन्तु नः ॥ (१)
जो देवगण दूर देश से आकर मनुष्यों के साथ मित्रता स्थापित करते हैं, मानवों द्वारा प्रसन्न होकर जो देव वैवस्वत मनु से उत्पन्न मनुष्यों को धारण करते हैं एवं जो देव नहुषपुत्र ययाति राजर्षि के यज्ञ में बैठते हैं, वे धन आदि देकर हमें पूजित करें. (१)
The devas who come from a distant land and establish friendship with human beings, who are pleased with the human beings, who possess the man born of the God Vaivasvata Manu and who sit in the yagna of The God Nahushputra Yayati Rajarshi, may worship us by giving us money, etc. (1)
ऋग्वेद (मंडल 10)
विश्वा॒ हि वो॑ नम॒स्या॑नि॒ वन्द्या॒ नामा॑नि देवा उ॒त य॒ज्ञिया॑नि वः । ये स्थ जा॒ता अदि॑तेर॒द्भ्यस्परि॒ ये पृ॑थि॒व्यास्ते म॑ इ॒ह श्रु॑ता॒ हव॑म् ॥ (२)
हे देवो! तुम्हारे सभी नाम नमस्कार के योग्य, वंदनीय एवं यज्ञ के योग्य हैं. जो देव अदिति, जल एवं पृथ्वी से उत्पन्न हुए हैं, वे यहां हमारी पुकार को सुनें. (२)
Oh, God! All your names are worthy of greeting, worthy of salutation and worthy of yajna. The gods who were born of Aditi, water and earth, listen to Our call here. (2)
ऋग्वेद (मंडल 10)
येभ्यो॑ मा॒ता मधु॑म॒त्पिन्व॑ते॒ पयः॑ पी॒यूषं॒ द्यौरदि॑ति॒रद्रि॑बर्हाः । उ॒क्थशु॑ष्मान्वृषभ॒रान्स्वप्न॑स॒स्ताँ आ॑दि॒त्याँ अनु॑ मदा स्व॒स्तये॑ ॥ (३)
पृथ्वी माता जिन देवों के लिए मधुर दूध बहाती है और अदीन तथा बादलों से घिरा हुआ आकाश जिनके लिए अमृत धारण करता है, उन प्रशंसनीय शक्ति वाले, वर्षा करने वाले, शोभन कर्म वाले एवं अदितिपुत्र देवों के लिए स्तुति करो. (३)
Praise the gods for whom Mother Earth pours out sweet milk and for the deities for whom Adin and the cloud-riddled sky holds nectar, those with admirable power, the rainers, the doers of adornment and the sons of Aditi. (3)
ऋग्वेद (मंडल 10)
नृ॒चक्ष॑सो॒ अनि॑मिषन्तो अ॒र्हणा॑ बृ॒हद्दे॒वासो॑ अमृत॒त्वमा॑नशुः । ज्यो॒तीर॑था॒ अहि॑माया॒ अना॑गसो दि॒वो व॒र्ष्माणं॑ वसते स्व॒स्तये॑ ॥ (४)
बिना पलक गिराए यज्ञकर्म के नेताओं को देखने वाले देवों ने लोक की रक्षा के लिए विस्तृत अमृत प्राप्त किया था. तेजस्वी रथ वाले, विघ्नरहित यज्ञकर्मो वाले व पापरहित देवगण लोगों के कल्याण के लिए स्वर्ग के उन्नत प्रदेश में रहते हैं. (४)
The devas who saw the leaders of the yagnakarma without dropping an eyelid had obtained elaborate nectar to protect the folk. The bright charioteers, those with non-disturbance yagnakarmas and sinless devas live in the advanced region of heaven for the welfare of the people. (4)
ऋग्वेद (मंडल 10)
स॒म्राजो॒ ये सु॒वृधो॑ य॒ज्ञमा॑य॒युरप॑रिह्वृता दधि॒रे दि॒वि क्षय॑म् । ताँ आ वि॑वास॒ नम॑सा सुवृ॒क्तिभि॑र्म॒हो आ॑दि॒त्याँ अदि॑तिं स्व॒स्तये॑ ॥ (५)
अपने तेज से भली-भांति सुशोभित एवं भली प्रकार उन्नत जो देव यज्ञ में आते हैं एवं किसी के द्वारा भी अहिंसित होकर स्वर्ग में रहते हैं, उन महान् देवों और अदिति की सेवा कल्याण के निमित्त नमस्कार एवं शोभन स्तुतियों द्वारा करो. (५)
Serve those great gods and Goddesses and Aditi who are well-groomed and well-advanced with your swiftness and live in heaven without any one, for the welfare of those great gods and Aditi. (5)
ऋग्वेद (मंडल 10)
को वः॒ स्तोमं॑ राधति॒ यं जुजो॑षथ॒ विश्वे॑ देवासो मनुषो॒ यति॒ ष्ठन॑ । को वो॑ऽध्व॒रं तु॑विजाता॒ अरं॑ कर॒द्यो नः॒ पर्ष॒दत्यंहः॑ स्व॒स्तये॑ ॥ (६)
हे देवो! मेरे अतिरिक्त कौन तुम्हारी स्तुति कर सकता है, जिसकी तुम सेवा करो? हे ज्ञाता देवो! तुम संतान वाले बनो. मेरे अतिरिक्त कौन यजमान स्तुतियों द्वारा तुम्हारा यज्ञ अलंकृत करता है. यज्ञ हमें पाप से बचाकर हमारा कल्याण करता है. (६)
Oh, God! Who can praise you besides Me, whom you serve? O god of the knower! You become the child. Who besides Me adorns your yajna by host hymns? Yajna does us well by saving us from sin. (6)
ऋग्वेद (मंडल 10)
येभ्यो॒ होत्रां॑ प्रथ॒मामा॑ये॒जे मनुः॒ समि॑द्धाग्नि॒र्मन॑सा स॒प्त होतृ॑भिः । त आ॑दित्या॒ अभ॑यं॒ शर्म॑ यच्छत सु॒गा नः॑ कर्त सु॒पथा॑ स्व॒स्तये॑ ॥ (७)
सबसे पहले मनु श्रद्धायुक्त मन से सात होताओं के साथ अग्ने प्रज्वलित करके स्तुतियों द्वारा जिन देवों का यजन करते हैं, वे देव हमें निर्भय करें, कल्याण दें एवं हमारी भलाई के लिए सभी मार्गो को सुगम बनावें. (७)
First of all, let the gods whom Manu worships through praises by lighting the agne with seven hotas with a reverential mind, may the gods whom he worships us without fear, give us welfare and make all the paths easier for our well-being. (7)
ऋग्वेद (मंडल 10)
य ईशि॑रे॒ भुव॑नस्य॒ प्रचे॑तसो॒ विश्व॑स्य स्था॒तुर्जग॑तश्च॒ मन्त॑वः । ते नः॑ कृ॒तादकृ॑ता॒देन॑स॒स्पर्य॒द्या दे॑वासः पिपृता स्व॒स्तये॑ ॥ (८)
उत्तम ज्ञान वाले एवं सर्वज्ञ देव समस्त जंगम लोक के स्वामी हैं. हे देवो! तुम हमें कृत अथवा अकृत पाप से बचाकर आज हमारे कल्याण को बढ़ाओ. (८)
The god of good knowledge and omniscient is the master of all the movable worlds. O God! You increase our welfare today by saving us from committed or uncratic sin. (8)