हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.63.7

मंडल 10 → सूक्त 63 → श्लोक 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 63
येभ्यो॒ होत्रां॑ प्रथ॒मामा॑ये॒जे मनुः॒ समि॑द्धाग्नि॒र्मन॑सा स॒प्त होतृ॑भिः । त आ॑दित्या॒ अभ॑यं॒ शर्म॑ यच्छत सु॒गा नः॑ कर्त सु॒पथा॑ स्व॒स्तये॑ ॥ (७)
सबसे पहले मनु श्रद्धायुक्त मन से सात होताओं के साथ अग्ने प्रज्वलित करके स्तुतियों द्वारा जिन देवों का यजन करते हैं, वे देव हमें निर्भय करें, कल्याण दें एवं हमारी भलाई के लिए सभी मार्गो को सुगम बनावें. (७)
First of all, let the gods whom Manu worships through praises by lighting the agne with seven hotas with a reverential mind, may the gods whom he worships us without fear, give us welfare and make all the paths easier for our well-being. (7)