हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.73.3

मंडल 10 → सूक्त 73 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 73
ऋ॒ष्वा ते॒ पादा॒ प्र यज्जिगा॒स्यव॑र्ध॒न्वाजा॑ उ॒त ये चि॒दत्र॑ । त्वमि॑न्द्र सालावृ॒कान्स॒हस्र॑मा॒सन्द॑धिषे अ॒श्विना व॑वृत्याः ॥ (३)
हे इंद्र! तुम्हारे चरण महान्‌ हैं. तुम जिस समय चलते हो, उस समय ऋभुगण एवं वहां उपस्थित देव बढ़ते हैं. तुम हजार भेड़ियों को मुख में धारण करते हो तथा अश्चिनीकुमारों को घुमा सकते हो. (३)
O Indra! Your feet are great. At the time you walk, the sages and the gods present there grow. You hold a thousand wolves in your mouth and you can turn the ashchinakumaras. (3)