ऋग्वेद (मंडल 10)
द्रु॒हो निष॑त्ता पृश॒नी चि॒देवैः॑ पु॒रू शंसे॑न वावृधु॒ष्ट इन्द्र॑म् । अ॒भीवृ॑तेव॒ ता म॑हाप॒देन॑ ध्वा॒न्तात्प्र॑पि॒त्वादुद॑रन्त॒ गर्भाः॑ ॥ (२)
मरुतों के साथ-साथ इंद्र की सेना भी इंद्र के समीप बैठी है. मरुतों ने विशाल स्तोत्रों दवारा इंद्र को बढ़ाया. जिस प्रकार बंद गोष्ठ के खुलने पर गाएं बाहर निकलती हैं, उसी प्रकार अंधकाररूप मेघ के भीतर से वर्षा का जल बाहर निकला. (२)
Along with the Maruts, Indra's army is also sitting near Indra. The Maruts extended indra to the vast hymns. Just as the cows come out when the closed seminar opens, so the rainwater came out from within the dark cloud. (2)