ऋग्वेद (मंडल 10)
त्वं नो॑ अग्ने अध॒रादुद॑क्ता॒त्त्वं प॒श्चादु॒त र॑क्षा पु॒रस्ता॑त् । प्रति॒ ते ते॑ अ॒जरा॑स॒स्तपि॑ष्ठा अ॒घशं॑सं॒ शोशु॑चतो दहन्तु ॥ (२०)
हे अग्नि! तुम हमें दक्षिण, उत्तर, पश्चिम एवं पूर्व दिशाओं से बचाओ. तुम्हारी अतिशय तप्त, जरारहित एवं ज्वलित किरणों पापी राक्षसों को भस्म कर दें. (२०)
O agni! You save us from south, north, west and east directions. Let your overheated, unburnt and burning rays devour the sinful demons. (20)