ऋग्वेद (मंडल 10)
अ॒व॒पत॑न्तीरवदन्दि॒व ओष॑धय॒स्परि॑ । यं जी॒वम॒श्नवा॑महै॒ न स रि॑ष्याति॒ पूरु॑षः ॥ (१७)
ओषधियों ने स्वर्ग से नीचे उतरते समय कहा था कि हम जिस जीवित व्यक्ति में प्रवेश कर जाती हैं, वह नष्ट नहीं होता. (१७)
The ushadhis, when they came down from heaven, said that the living person we enter into is not destroyed. (17)