हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 10.97.18

मंडल 10 → सूक्त 97 → श्लोक 18 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 10)

ऋग्वेद: | सूक्त: 97
या ओष॑धीः॒ सोम॑राज्ञीर्ब॒ह्वीः श॒तवि॑चक्षणाः । तासां॒ त्वम॑स्युत्त॒मारं॒ कामा॑य॒ शं हृ॒दे ॥ (१८)
हे ओषधि! जो ओषधियां सोम राजा की प्रजा हैं, अगणित एवं अति कुशल हैं, तुम उन में उत्तम हो. तुम अभिलाषा को पूर्ण करके मन को शांति दो. (१८)
O medicine! You are the best of those medicines who are the subjects of Soma Raja, uncountable and very skilled. You fulfill the desire and give peace to the mind. (18)