ऋग्वेद (मंडल 10)
उच्छुष्मा॒ ओष॑धीनां॒ गावो॑ गो॒ष्ठादि॑वेरते । धनं॑ सनि॒ष्यन्ती॑नामा॒त्मानं॒ तव॑ पूरुष ॥ (८)
हे रोगी पुरुष! ओषधियों से बल उसी प्रकार बाहर निकलता है, जिस प्रकार गोशाला से गाएं बाहर जाती हैं. ये ओषधियां तुम्हें स्वास्थ्यरूपी धन देती हैं. (८)
O patient man! The force comes out of the herbs in the same way as the cows go out of the goshala. These herbs give you healthy wealth. (8)