ऋग्वेद (मंडल 2)
यो मे॑ राज॒न्युज्यो॑ वा॒ सखा॑ वा॒ स्वप्ने॑ भ॒यं भी॒रवे॒ मह्य॒माह॑ । स्ते॒नो वा॒ यो दिप्स॑ति नो॒ वृको॑ वा॒ त्वं तस्मा॑द्वरुण पाह्य॒स्मान् ॥ (१०)
हे राजा वरुण! मुझ भीरु को स्वप्न की भयानक बातें कहने वाले मित्र से बचाओ. मुझे हिंसा करने वाले चोर एवं भेड़िए से बचाओ. (१०)
O King Varuna! Save me from a friend who says terrible things of the dream. Save me from thieves and wolves who commit violence. (10)