ऋग्वेद (मंडल 2)
धृत॑व्रता॒ आदि॑त्या॒ इषि॑रा आ॒रे मत्क॑र्त रह॒सूरि॒वागः॑ । शृ॒ण्व॒तो वो॒ वरु॑ण॒ मित्र॒ देवा॑ भ॒द्रस्य॑ वि॒द्वाँ अव॑से हुवे वः ॥ (१)
हे व्रतधारी, सबके प्रार्थनीय एवं शीघ्रगामी अदितिपुत्रो! जिस प्रकार व्यभिचारिणी गुप्तरूप से जन्म लेने वाले बालक को दूर फेंक देती है, उसी प्रकार तुम मेरा पाप मुझसे दूर हटा दो. हे मित्र और वरुण! मैं तुम्हारे द्वारा किए हुए मंगल कार्यों को जानता हूं. मैं तुम्हें रक्षा के लिए बुलाता हूं. तुम मेरी पुकार सुनो. (१)
O fasting, all the prayable and soon-to-do Aditiputras! Just as the adulterer throws away the child who is born secretly, so take away my sin from me. Hey friend and Varun! I know the good work you have done. I'll call you to the defense. You listen to my call. (1)
ऋग्वेद (मंडल 2)
यू॒यं दे॑वाः॒ प्रम॑तिर्यू॒यमोजो॑ यू॒यं द्वेषां॑सि सनु॒तर्यु॑योत । अ॒भि॒क्ष॒त्तारो॑ अ॒भि च॒ क्षम॑ध्वम॒द्या च॑ नो मृ॒ळय॑ताप॒रं च॑ ॥ (२)
हे देवो! तुम उत्तम बुद्धि एवं बलसंपन्न हो. तुम हमारे विरोधियों को गुप्त स्थान में ले जाओ. हे शत्रुनाशक देवो! तुम भी हमारे शत्रुओं को हराओ एवं आज तथा आने वाले कल में सुखी करो. (२)
Oh, God! You are of excellent intelligence and strength. You take our opponents to the secret place. O gods of enemies! May you also defeat our enemies and make them happy today and tomorrow. (2)
ऋग्वेद (मंडल 2)
किमू॒ नु वः॑ कृणवा॒माप॑रेण॒ किं सने॑न वसव॒ आप्ये॑न । यू॒यं नो॑ मित्रावरुणादिते च स्व॒स्तिमि॑न्द्रामरुतो दधात ॥ (३)
हे देवो! हम आज या आने वाले दिनों में तुम्हारा कोन सा कार्य कर सकते हैं? अर्थात् कोई नहीं. हम सनातन प्राप्तव्य कार्य द्वारा भी कुछ नहीं कर सकते. हे मित्र, वरुण, अदिति, इंद्र एवं मरुद्गण! हमारा कल्याण करो. (३)
Oh, God! What kind of work can we do for you today or in the days to come? i.e. none. We can't do anything even through eternal achievable work. O friends, Varuna, Aditi, Indra and Marudgana! Do us well. (3)
ऋग्वेद (मंडल 2)
ह॒ये दे॑वा यू॒यमिदा॒पयः॑ स्थ॒ ते मृ॑ळत॒ नाध॑मानाय॒ मह्य॑म् । मा वो॒ रथो॑ मध्यम॒वाळृ॒ते भू॒न्मा यु॒ष्माव॑त्स्वा॒पिषु॑ श्रमिष्म ॥ (४)
हे देवो! तुम्हीं हमारे बांधव हो. प्रार्थना करने वाले हम लोगों को तुम सुख दो. हमारे यज्ञ में आते समय तुम्हारे रथ की गति मंद न हो. तुम बांधवों के होते हुए हम परेशान न हों. (४)
Oh, God! You are our brother. May you give happiness to us who pray. Do not slow down the speed of your chariot while coming to our yagna. Let us not be disturbed by you brothers. (4)
ऋग्वेद (मंडल 2)
प्र व॒ एको॑ मिमय॒ भूर्यागो॒ यन्मा॑ पि॒तेव॑ कित॒वं श॑शा॒स । आ॒रे पाशा॑ आ॒रे अ॒घानि॑ देवा॒ मा माधि॑ पु॒त्रे विमि॑व ग्रभीष्ट ॥ (५)
हे देवगण! मैंने मनुष्य होते हुए भी तुम लोगों के बीच रहकर अपने बहुत से पाप नष्ट किए हैं. जिस प्रकार पिता कुमार्गगामी पुत्र को रोकता है, उसी प्रकार तुमने मुझे अनुशासन में रखा है. हे देवो! मुझे बंधन और पाप से दूर रखो. व्याध जिस प्रकार पुत्र के सामने पक्षी पिता को मारता है, उसी प्रकार मुझे मत मारना. (५)
O Gods! I have destroyed many of my sins by being among you, though I am a human being. Just as the father stops the son, so you have kept me in discipline. Oh, God! Keep me away from bondage and sin. Don't kill me just as the bird kills the Father in front of the Son. (5)
ऋग्वेद (मंडल 2)
अ॒र्वाञ्चो॑ अ॒द्या भ॑वता यजत्रा॒ आ वो॒ हार्दि॒ भय॑मानो व्ययेयम् । त्राध्वं॑ नो देवा नि॒जुरो॒ वृक॑स्य॒ त्राध्वं॑ क॒र्ताद॑व॒पदो॑ यजत्राः ॥ (६)
हे यज्ञ योग्य देवो! इस समय हमारे सामने आओ. मैं डरता हुआ तुम्हारे हृदय में आश्रय पाऊं. हे देवो! भेड़िए की हिंसा से हमें बचाओ. हे यज्ञपात्रो! हमें विपत्ति में डालने वालों से बचाओ. (६)
O god worthy of sacrifice! Come in front of us at this time. I may find refuge in your heart in fear. Oh, God! Save us from the violence of the wolf. O Yagyapatro! Save us from those who plunge us into adversity. (6)
ऋग्वेद (मंडल 2)
माहं म॒घोनो॑ वरुण प्रि॒यस्य॑ भूरि॒दाव्न॒ आ वि॑दं॒ शून॑मा॒पेः । मा रा॒यो रा॑जन्सु॒यमा॒दव॑ स्थां बृ॒हद्व॑देम वि॒दथे॑ सु॒वीराः॑ ॥ (७)
हे राजा वरुण! मुझे किसी धनी एवं दानी पुरुष के सामने अपनी निर्धनता न कहनी पड़े. मेरे पास जीवन के लिए आवश्यक धन की कमी न हो. हम शोभन पुत्र-पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां करेंगे. (७)
O King Varuna! I don't have to say my poverty in front of a rich and charitable man. I don't lack the money I need for life. We will receive shobhan's son-grandson and do many praises in this yajna. (7)