हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 2.34.5

मंडल 2 → सूक्त 34 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 2)

ऋग्वेद: | सूक्त: 34
इन्ध॑न्वभिर्धे॒नुभी॑ र॒प्शदू॑धभिरध्व॒स्मभिः॑ प॒थिभि॑र्भ्राजदृष्टयः । आ हं॒सासो॒ न स्वस॑राणि गन्तन॒ मधो॒र्मदा॑य मरुतः समन्यवः ॥ (५)
हे समान क्रोध वाले एवं दीप्तियुक्त आयुधों वाले मरुद्गण! हंस जिस प्रकार अपने निवासस्थान पर उतरते हैं, उसी प्रकार तुम दुधारू गायों एवं गरजते हुए मेघों के साथ विघ्नरहित पथ से मधुर सोमरस द्वारा प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए आओ. (५)
O the deserts with equal anger and radiant weapons! Just as the swans descend upon their abode, so come to find happiness through the sweet somarahs from the path of disruption with the milch cows and the thundering clouds. (5)