हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 2.34.6

मंडल 2 → सूक्त 34 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 2)

ऋग्वेद: | सूक्त: 34
आ नो॒ ब्रह्मा॑णि मरुतः समन्यवो न॒रां न शंसः॒ सव॑नानि गन्तन । अश्वा॑मिव पिप्यत धे॒नुमूध॑नि॒ कर्ता॒ धियं॑ जरि॒त्रे वाज॑पेशसम् ॥ (६)
हे समान क्रोध वाले मरुतो! तुम जिस प्रकार हमारी स्तुतियां सुनने आते हो, उसी प्रकार हमारे हव्य अन्न के प्रति आओ. तुम गाय को घोड़ों के समान पुष्ट अंग वाली तथा यजमान का यज्ञ अन्नयुक्त करो. (६)
O Maruto of equal anger! Just as you come to hear Our praises, so come to our good food. You give the cow a strong organ like a horse and the host's yajna. (6)