ऋग्वेद (मंडल 2)
ओष्ठा॑विव॒ मध्वा॒स्ने वद॑न्ता॒ स्तना॑विव पिप्यतं जी॒वसे॑ नः । नासे॑व नस्त॒न्वो॑ रक्षि॒तारा॒ कर्णा॑विव सु॒श्रुता॑ भूतम॒स्मे ॥ (६)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम दोनों होंठों के समान मधुर वचन बोलो, दो स्तनों के समान हमारी जीवन रक्षा के लिए दूध पिलाओ, नासिका के दोनों छिद्रों के समान हमारे शरीर-रक्षक बनो एवं कानों के समान हमारी बात सुनो. (६)
O aschinikumaro! Speak sweet words like both your lips, feed us like two breasts to protect our lives, be our body-protector like both the pores of the nostrils and listen to us like ears. (6)