ऋग्वेद (मंडल 2)
ग्रावा॑णेव॒ तदिदर्थं॑ जरेथे॒ गृध्रे॑व वृ॒क्षं नि॑धि॒मन्त॒मच्छ॑ । ब्र॒ह्माणे॑व वि॒दथ॑ उक्थ॒शासा॑ दू॒तेव॒ हव्या॒ जन्या॑ पुरु॒त्रा ॥ (१)
हे अश्विनीकुमारो! तुम फेंके हुए पत्थर के समान शत्रु को बाधा पहुंचाओ. जिस प्रकार पक्षी फल वाले वृक्ष पर जाते हैं, उसी प्रकार तुम धन वाले यजमान के पास जाओ. तुम मंत्र उच्चारण करने वाले ब्रह्मा एवं जनपद में राजा द्वारा भेजे गए दूतों के समान अनेक लोगों द्वारा बुलाने योग्य हो. (१)
O Ashwinikumaro! You hinder the enemy like a stone thrown. Just as the birds go to the fruit tree, so do you go to the host of wealth. You deserve to be called by many people like brahma who chants mantras and messengers sent by the king to the district. (1)
ऋग्वेद (मंडल 2)
प्रा॒त॒र्यावा॑णा र॒थ्ये॑व वी॒राजेव॑ य॒मा वर॒मा स॑चेथे । मेने॑ इव त॒न्वा॒३॒॑ शुम्भ॑माने॒ दम्प॑तीव क्रतु॒विदा॒ जने॑षु ॥ (२)
हे अश्विनीकुमारो! प्रातःकाल यज्ञ के लिए जाने वाले रथ-स्वामियों के समान वीर, छागों के समान यमल, नारियों के समान शोभन-शरीर, पति-पत्नी के समान साथ रहने वाले एवं सबके यज्ञकर्मो के ज्ञाता तुम दोनों सेवक के पास आओ. (२)
O Ashwinikumaro! In the morning, brave as the chariot-owners who go for the yajna, yamal like the shadows, the body as the women, the body of the woman, the two of you who live together as husband and wife and the knower of all the yajnakarmas, come to the servant. (2)
ऋग्वेद (मंडल 2)
शृङ्गे॑व नः प्रथ॒मा ग॑न्तम॒र्वाक्छ॒फावि॑व॒ जर्भु॑राणा॒ तरो॑भिः । च॒क्र॒वा॒केव॒ प्रति॒ वस्तो॑रुस्रा॒र्वाञ्चा॑ यातं र॒थ्ये॑व शक्रा ॥ (३)
हे अश्विनीकुमारो! तुम पशुओं के सींगों के समान सभी देवों में प्रमुख हो. घोड़े के खुरों के समान वेग से चलते हुए तुम दोनों हमारे सामने आओ. हे शत्रुनाशक एवं अपने कर्म में समर्थ अश्चिनीकुमारो! तुम चकवा-चकवी अथवा दो रथ स्वामियों के समान हमारे पास आओ. (३)
O Ashwinikumaro! You are the chief of all gods like the horns of animals. Walk at the same speed as the horse's hooves, you both come before us. O enemies and capable of your deeds, Aschinikumaro! You come to us like chakwa-chakvi or two chariot owners. (3)
ऋग्वेद (मंडल 2)
ना॒वेव॑ नः पारयतं यु॒गेव॒ नभ्ये॑व न उप॒धीव॑ प्र॒धीव॑ । श्वाने॑व नो॒ अरि॑षण्या त॒नूनां॒ खृग॑लेव वि॒स्रसः॑ पातम॒स्मान् ॥ (४)
हे अश्विनीकुमारो! नाव जिस प्रकार लोगों को नदी के पार उतार देती है, उसी प्रकार तुम हमें दुःखों से पार पहुंचाओ. जुआ, पहिए की नाभि, अरे और पुठी जिस प्रकार रथ को पार करते हैं, उसी प्रकार तुम हमें पार लगाओ. तुम कुत्तों की तरह हमें शरीरनाश एवं कवच के समान बुढ़ापे से बचाओ. (४)
O Ashwinikumaro! Just as the boat lands people across the river, so do you bring us across with sorrows. Gambling, the navel of the wheel, hey and puthi cross us in the same way as they cross the chariot. You like dogs save us from old age like bodyblock and armor. (4)
ऋग्वेद (मंडल 2)
वाते॑वाजु॒र्या न॒द्ये॑व री॒तिर॒क्षी इ॑व॒ चक्षु॒षा या॑तम॒र्वाक् । हस्ता॑विव त॒न्वे॒३॒॑ शम्भ॑विष्ठा॒ पादे॑व नो नयतं॒ वस्यो॒ अच्छ॑ ॥ (५)
हे वायु के समान नाशरहित, नदियों के समान शीघ्रगामी एवं नेत्रों के समान दर्शक अश्विनीकुमारो! हमारे सामने आओ. तुम हाथपैरों के समान हमारे शरीर को सुख देने वाले होकर हमें उत्तम धन की ओर प्रेरित करो. (५)
O you, as perishable as the wind, as fast as rivers and as an eye-sighted as Ashvinikumaro! Come before us. You, like the hands, inspire us towards better wealth by being a pleasure to our body. (5)
ऋग्वेद (मंडल 2)
ओष्ठा॑विव॒ मध्वा॒स्ने वद॑न्ता॒ स्तना॑विव पिप्यतं जी॒वसे॑ नः । नासे॑व नस्त॒न्वो॑ रक्षि॒तारा॒ कर्णा॑विव सु॒श्रुता॑ भूतम॒स्मे ॥ (६)
हे अश्चिनीकुमारो! तुम दोनों होंठों के समान मधुर वचन बोलो, दो स्तनों के समान हमारी जीवन रक्षा के लिए दूध पिलाओ, नासिका के दोनों छिद्रों के समान हमारे शरीर-रक्षक बनो एवं कानों के समान हमारी बात सुनो. (६)
O aschinikumaro! Speak sweet words like both your lips, feed us like two breasts to protect our lives, be our body-protector like both the pores of the nostrils and listen to us like ears. (6)
ऋग्वेद (मंडल 2)
हस्ते॑व श॒क्तिम॒भि सं॑द॒दी नः॒ क्षामे॑व नः॒ सम॑जतं॒ रजां॑सि । इ॒मा गिरो॑ अश्विना युष्म॒यन्तीः॒ क्ष्णोत्रे॑णेव॒ स्वधि॑तिं॒ सं शि॑शीतम् ॥ (७)
हे अश्विनीकुमारो! हाथों के समान हमें सामर्थ्य दो एवं धरती-आकाश के समान जल प्रदान करो. हमारे द्वारा की गई स्तुतियां तुम्हारे समीप जाती हैं. सान जिस प्रकार तलवार को तेज कर देती है, उसी प्रकार तुम हमारी स्तुतियों को तीक्ष्ण बनाओ. (७)
O Ashwinikumaro! Give us strength as hands and give us water like earth and sky. The praises we have made go near you. Just as San sharpens the sword, so do you sharpen our praises. (7)
ऋग्वेद (मंडल 2)
ए॒तानि॑ वामश्विना॒ वर्ध॑नानि॒ ब्रह्म॒ स्तोमं॑ गृत्सम॒दासो॑ अक्रन् । तानि॑ नरा जुजुषा॒णोप॑ यातं बृ॒हद्व॑देम वि॒दथे॑ सु॒वीराः॑ ॥ (८)
हे अश्चिनीकुमारो! गृत्समद ऋषि ने ये मंत्र तथा स्तोत्र तुम्हारी उन्नति के लिए रचे हैं. हे नेताओ! तुम उन्हें चाहते हुए आओ. हम शोभन पुत्र-पौत्र प्राप्त करके इस यज्ञ में बहुत सी स्तुतियां बोलेंगे. (८)
O aschinikumaro! Sage Gritsamad has composed these mantras and hymns for your advancement. Hey leaders! You come wanting them. We will receive shobhan son-grandson and speak many praises in this yajna. (8)