ऋग्वेद (मंडल 2)
प्रेतां॑ य॒ज्ञस्य॑ श॒म्भुवा॑ यु॒वामिदा वृ॑णीमहे । अ॒ग्निं च॑ हव्य॒वाह॑नम् ॥ (१९)
हे सुखपूर्वक यज्ञ पूर्ण करने वाले धरती-आकाश! आओ. हम तुम्हारी एवं हव्यवाहन अन्नि की प्रार्थना करते हैं. (१९)
O earth and sky that gladly complete the yajna! Come. We pray to you and to Havavahana Anni. (19)