ऋग्वेद (मंडल 2)
द्यावा॑ नः पृथि॒वी इ॒मं सि॒ध्रम॒द्य दि॑वि॒स्पृश॑म् । य॒ज्ञं दे॒वेषु॑ यच्छताम् ॥ (२०)
धरती और आकाश स्वर्ग आदि के साधक तथा देवों के समीप जाने वाले हैं. वे हमारा यह यज्ञ देवों के समीप ले जावें. (२०)
Earth and sky are going to approach the seekers and gods of heaven etc. Let them take our yajna near the gods. (20)