हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 2.41.8

मंडल 2 → सूक्त 41 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 2)

ऋग्वेद: | सूक्त: 41
न यत्परो॒ नान्त॑र आद॒धर्ष॑द्वृषण्वसू । दुः॒शंसो॒ मर्त्यो॑ रि॒पुः ॥ (८)
हे धनवर्षक अश्चिनीकुमारो! हमें ऐसा धन दो, जिसे न दूरवर्ती और न समीपवर्ती शन्रु मनुष्य चुरा सके. (८)
O rich year ashchinikumaro! Give us money that neither remote nor near-term humans can steal. (8)