हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.50.2

मंडल 3 → सूक्त 50 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 50
आ ते॑ सप॒र्यू ज॒वसे॑ युनज्मि॒ ययो॒रनु॑ प्र॒दिवः॑ श्रु॒ष्टिमावः॑ । इ॒ह त्वा॑ धेयु॒र्हर॑यः सुशिप्र॒ पिबा॒ त्व१॒॑स्य सुषु॑तस्य॒ चारोः॑ ॥ (२)
हे इंद्र! तुम यज्ञ में शीघ्र पहुंच सको, इसलिए हम तुम्हारे रथ में परिचारक रूप घोड़े जोड़ते हैं. पुरातन तुम उन घोड़ों की गति के अनुसार चलते हो. हे सुंदर ठोड़ी वाले इंद्र! घोड़े तुम्हें यज्ञ में लावें. तुम आकर सुंदर एवं भली-भांति निचोड़ा गया सोम पिओ. (२)
O Indra! You can reach the yajna early, so we add horses in your chariot as attendants. Archaic you walk according to the speed of those horses. O beautiful chin Indra! Let the horses bring you to the yagna. You come and drink the beautiful and well-squeezed mon. (2)