ऋग्वेद (मंडल 3)
य इ॒मे रोद॑सी उ॒भे अ॒हमिन्द्र॒मतु॑ष्टवम् । वि॒श्वामि॑त्रस्य रक्षति॒ ब्रह्मे॒दं भार॑तं॒ जन॑म् ॥ (१२)
हे पुत्रो! मैं विश्वामित्र धरती और आकाश द्वारा इंद्र की स्तुति कराता हूं. यह स्तोत्र भरतवंशीय लोगों की रक्षा करे. (१२)
O children! I praise Indra through Vishwamitra, earth and sky. This hymn should protect the Bharat's descendants. (12)