हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 3.61.5

मंडल 3 → सूक्त 61 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 3)

ऋग्वेद: | सूक्त: 61
अच्छा॑ वो दे॒वीमु॒षसं॑ विभा॒तीं प्र वो॑ भरध्वं॒ नम॑सा सुवृ॒क्तिम् । ऊ॒र्ध्वं म॑धु॒धा दि॒वि पाजो॑ अश्रे॒त्प्र रो॑च॒ना रु॑रुचे र॒ण्वसं॑दृक् ॥ (५)
हे स्तोताओ! तुम अपने सामने शोभन पाती हुई उषा की सुंदर स्तुति नमस्कार सहित करो. स्तुति धारण वाली उषा आकाश में ऊपर जाने वाला तेज धारण करती है. तेजस्विनी एवं देखने में सुंदर उषा अच्छी तरह चमकती है. (५)
This stotao! You should do the beautiful praise of Usha in front of you with a greeting salutation. Usha, who holds praise, holds the lightning that goes up in the sky. Tejaswini and the beautiful Usha shines well in appearance. (5)