ऋग्वेद (मंडल 3)
ऋ॒ताव॑री दि॒वो अ॒र्कैर॑बो॒ध्या रे॒वती॒ रोद॑सी चि॒त्रम॑स्थात् । आ॒य॒तीम॑ग्न उ॒षसं॑ विभा॒तीं वा॒ममे॑षि॒ द्रवि॑णं॒ भिक्ष॑माणः ॥ (६)
सत्ययुक्त उषा को दिव्य तेज के कारण सब जानते हैं. धनवाली उषा अपने विविध रूपों से धरती-आकाश को भर देती है. हे अग्नि! तुम्हारे सामने आती हुई एवं प्रकाशयुक्त उषा से मांगते हुए तुम सुंदर धन पाते हो. (६)
Everyone knows the truth-ridden Usha because of the divine brightness. The wealthy Usha fills the earth and sky with her various forms. O agni! You get beautiful wealth by coming in front of you and asking for a lighty Usha. (6)