ऋग्वेद (मंडल 3)
बृह॑स्पते जु॒षस्व॑ नो ह॒व्यानि॑ विश्वदेव्य । रास्व॒ रत्ना॑नि दा॒शुषे॑ ॥ (४)
हे सब देवों के हितकारी बृहस्पति! इन लोगों के हव्य का सेवन करो एवं यजमान को उत्तम धन दो. (४)
O Jupiter, the benefactor of all the gods! Eat the havya of these people and give the host the best money. (4)