ऋग्वेद (मंडल 3)
वृ॒ष॒भं च॑र्षणी॒नां वि॒श्वरू॑प॒मदा॑भ्यम् । बृह॒स्पतिं॒ वरे॑ण्यम् ॥ (६)
कामवर्षी, विश्वरूप नामक बैल की सवारी वाले, तिरस्कार न करने योग्य एवं सबके सेवा योग्य बृहस्पति से मैं मनचाहा फल मांगता हूं. (६)
I ask for the desired fruit from a lustful, undeserved and serviceable Jupiter, riding a bull named Vishwaroop. (6)