हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.30.16

मंडल 4 → सूक्त 30 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 30
उ॒त त्यं पु॒त्रम॒ग्रुवः॒ परा॑वृक्तं श॒तक्र॑तुः । उ॒क्थेष्विन्द्र॒ आभ॑जत् ॥ (१६)
शतक्रतु इंद्र ने अग्रु के पुत्र परावृक्त को स्तोत्रों का भागी बनाया. (१६)
Shatrattu Indra made Paravarishta, the son of Agra, a partaker of the hymns. (16)