हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 4.32.17

मंडल 4 → सूक्त 32 → श्लोक 17 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 4)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
स॒हस्रं॒ व्यती॑नां यु॒क्ताना॒मिन्द्र॑मीमहे । श॒तं सोम॑स्य खा॒र्यः॑ ॥ (१७)
हम स्तुतिकर्ता इंद्र से हजारों सीखे हुए तेज गति वाले घोड़े तथा सोमरस के सैकड़ों कलश मांगते हैं. (१७)
We ask the praiseor Indra for thousands of learned high-speed horses and hundreds of somras kalash. (17)