हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.32.4

मंडल 5 → सूक्त 32 → श्लोक 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 32
त्यं चि॑देषां स्व॒धया॒ मद॑न्तं मि॒हो नपा॑तं सु॒वृधं॑ तमो॒गाम् । वृष॑प्रभर्मा दान॒वस्य॒ भामं॒ वज्रे॑ण व॒ज्री नि ज॑घान॒ शुष्ण॑म् ॥ (४)
बरसने वाले मेघ को वज्र से मारने वाले वज्रधारी इंद्र ने शुष्ण असुर को मारा. वह असुर प्राणियों का अन्न खाकर प्रसन्न था, वर्षा करने वाले मेघ का रक्षक था एवं तमोगुणरूपी अंधकार के प्रति गतिशील था. (४)
Vajradhari Indra, who killed the raining cloud with a thunderbolt, killed the Shushna Asura. He was happy to eat the food of the asura creatures, was the protector of the raining cloud and was moving towards the darkness of tamoguna. (4)