ऋग्वेद (मंडल 5)
सु॒त॒म्भ॒रो यज॑मानस्य॒ सत्प॑ति॒र्विश्वा॑सा॒मूधः॒ स धि॒यामु॒दञ्च॑नः । भर॑द्धे॒नू रस॑वच्छिश्रिये॒ पयो॑ऽनुब्रुवा॒णो अध्ये॑ति॒ न स्व॒पन् ॥ (१३)
मुझ अवत्सार नामक यजमान के यज्ञ में सुतंभर नामक ऋषि फलों का पालन करते हैं. वे सभी यज्ञकर्मो को उन्नत फल की ओर प्रेरित करते हैं. गायें दूध देती हैं. मधुर दूध बांटा जाता है. निद्रा से जागकर अवत्सार इस प्रकार बोलते हुए अध्ययन करते हैं. (१३)
In the yajna of a host named Avatsar, a sage named Sutanbhar follows the fruits. They all inspire yajnakarmas towards advanced fruit. Cows give milk. Sweet milk is distributed. Waking up from sleep, the avatsars study by speaking in this way. (13)