ऋग्वेद (मंडल 5)
हयो॒ न वि॒द्वाँ अ॑युजि स्व॒यं धु॒रि तां व॑हामि प्र॒तर॑णीमव॒स्युव॑म् । नास्या॑ वश्मि वि॒मुचं॒ नावृतं॒ पुन॑र्वि॒द्वान्प॒थः पु॑रए॒त ऋ॒जु ने॑षति ॥ (१)
सब कुछ जानने वाले प्रतिक्षत्र ऋषि ने यज्ञ में अपने आपको इस तरह लगा दिया है, जैसे घोड़ा गाड़ी में जुत जाता है. हम अध्वर्यु एवं होता भी उस उद्धार करने वाले एवं रक्षाकारक कार्य का बोझा ढोते हैं. हम इससे छूटना नहीं चाहते और न इसे बार-बार ढोना चाहते हैं. मार्ग को जानने वाले देव आगे चलते हुए सरलतापूर्वक लोगों को ले चलें. (१)
The sage, who knows everything, has put himself in the yagna in such a way that a horse gets into a cart. We carry the burden of that savior and protectorate work. We don't want to get rid of it, nor do we want to carry it again and again. The god who knows the way, walk ahead and take people easily. (1)
ऋग्वेद (मंडल 5)
अग्न॒ इन्द्र॒ वरु॑ण॒ मित्र॒ देवाः॒ शर्धः॒ प्र य॑न्त॒ मारु॑तो॒त वि॑ष्णो । उ॒भा नास॑त्या रु॒द्रो अध॒ ग्नाः पू॒षा भगः॒ सर॑स्वती जुषन्त ॥ (२)
हे इंद्र, अग्नि, वरुण एवं मित्र देव! हमें बल दो. मरुद्गण एवं विष्णु भी हमें बल दें. दोनों अश्विनीकुमार, रुद्र, समस्त देवों की पत्नियां, पूषा, भग एवं सरस्वती हमारी स्तुति को स्वीकार करें. (२)
O Indra, Agni, Varuna and friend God! Give us strength. May the Deserts and Vishnu also give us strength. Let both Ashwini Kumar, Rudra, wives of all gods, Pusha, Bhaga and Saraswati accept our praise. (2)
ऋग्वेद (मंडल 5)
इ॒न्द्रा॒ग्नी मि॒त्रावरु॒णादि॑तिं॒ स्वः॑ पृथि॒वीं द्यां म॒रुतः॒ पर्व॑ताँ अ॒पः । हु॒वे विष्णुं॑ पू॒षणं॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिं॒ भगं॒ नु शंसं॑ सवि॒तार॑मू॒तये॑ ॥ (३)
हम रक्षा के निमित्त इंद्र, अग्नि, मित्र, वरुण, अदिति, धरती, आकाश, मरुद्गण, पर्वत, जल, विष्णु, पूषा, ब्रह्मणस्पति एवं भग को बुलाते हैं. (३)
We call Indra, Agni, Mitra, Varuna, Aditi, Prithvi, Akash, Marudgana, Parvat, Paans, Jal, Vishnu, Pusha, Brahmanaspati and Bhaga for the sake of protection. (3)
ऋग्वेद (मंडल 5)
उ॒त नो॒ विष्णु॑रु॒त वातो॑ अ॒स्रिधो॑ द्रविणो॒दा उ॒त सोमो॒ मय॑स्करत् । उ॒त ऋ॒भव॑ उ॒त रा॒ये नो॑ अ॒श्विनो॒त त्वष्टो॒त विभ्वानु॑ मंसते ॥ (४)
विष्णु अथवा अहिंसक वायु अथवा धन देने वाले सोम हमें सुख दें. ऋभुगण, अश्चिनीकुमार, त्वष्टा एवं विभु हमें धन देने के लिए प्रसन्न हों. (४)
May Vishnu or the non-violent air or the money-giving Mons give us happiness. May Ribhugana, Ashchinikumar, Tvashta and Vibhu be happy to give us money. (4)
ऋग्वेद (मंडल 5)
उ॒त त्यन्नो॒ मारु॑तं॒ शर्ध॒ आ ग॑मद्दिविक्ष॒यं य॑ज॒तं ब॒र्हिरा॒सदे॑ । बृह॒स्पतिः॒ शर्म॑ पू॒षोत नो॑ यमद्वरू॒थ्यं१॒॑ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मा ॥ (५)
स्वर्गलोक में रहने वाले तथा पूजा के योग्य मरुद्गण बिछे हुए कुशों पर बैठने के लिए हमारे पास आवें. बृहस्पति, पूषा, वरुण, मित्र तथा अर्यमा हमें घर से संबंधित सभी सुख दें. (५)
Come to us to sit on the well-laid kushas living in paradise and worthy of worship. May Jupiter, Pusha, Varuna, Friends and Aryama give us all the happiness related to the house. (5)
ऋग्वेद (मंडल 5)
उ॒त त्ये नः॒ पर्व॑तासः सुश॒स्तयः॑ सुदी॒तयो॑ न॒द्य१॒॑स्त्राम॑णे भुवन् । भगो॑ विभ॒क्ता शव॒साव॒सा ग॑मदुरु॒व्यचा॒ अदि॑तिः श्रोतु मे॒ हव॑म् ॥ (६)
शोभन स्तुतियों वाले पर्वत एवं उत्तम दान वाली नदियां हमारी रक्षा का कारण बनें. धनों को बांटने वाले भग अन्न के साथ हमारे पास आवें. सर्वत्र व्याप्त अदिति मेरी स्तुति को सुनें. (६)
May the mountains with adornment hymns and the rivers with the best donations be the reason for our protection. Let the clitoris who share the wealth come to us with the grain. Listen to my praise, Aditi, who is everywhere. (6)
ऋग्वेद (मंडल 5)
दे॒वानां॒ पत्नी॑रुश॒तीर॑वन्तु नः॒ प्राव॑न्तु नस्तु॒जये॒ वाज॑सातये । याः पार्थि॑वासो॒ या अ॒पामपि॑ व्र॒ते ता नो॑ देवीः सुहवाः॒ शर्म॑ यच्छत ॥ (७)
देवपत्नियां हमारी स्तुतियों की अभिलाषा करती हुई हमारी रक्षा करें. वे बलवान् पुत्र एवं अन्न पाने के लिए हमारी रक्षा करें. हे देवियो! आप धरती पर रहो अथवा आकाश में, पर हमें सुख प्रदान करो. (७)
May the wives of god protect us by longing for our praises. Let them protect us to get sons and food. Oh, ladies! Whether you live on earth or in the sky, but give us happiness. (7)
ऋग्वेद (मंडल 5)
उ॒त ग्ना व्य॑न्तु दे॒वप॑त्नीरिन्द्रा॒ण्य१॒॑ग्नाय्य॒श्विनी॒ राट् । आ रोद॑सी वरुणा॒नी शृ॑णोतु॒ व्यन्तु॑ दे॒वीर्य ऋ॒तुर्जनी॑नाम् ॥ (८)
देवपत्नियां हमारे हव्य को खाएं. इंद्राणी, अग्नायी, दीप्तियुक्त अश्विनी, रोदसी एवं वरुणानी देवी हमारा हव्य भक्षण करें. देवपत्नियों के मध्य ऋतुओं की देवी हमारा हव्य भक्षण करें. (८)
Dev-wife eat our havya. Indrani, Agnayee, Deeptiyukta Ashwini, Rodsi and Varunani Devi should eat our havya. May the goddess of the seasons between the devas and wives eat our havya. (8)