हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.46.3

मंडल 5 → सूक्त 46 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 46
इ॒न्द्रा॒ग्नी मि॒त्रावरु॒णादि॑तिं॒ स्वः॑ पृथि॒वीं द्यां म॒रुतः॒ पर्व॑ताँ अ॒पः । हु॒वे विष्णुं॑ पू॒षणं॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिं॒ भगं॒ नु शंसं॑ सवि॒तार॑मू॒तये॑ ॥ (३)
हम रक्षा के निमित्त इंद्र, अग्नि, मित्र, वरुण, अदिति, धरती, आकाश, मरुद्गण, पर्वत, जल, विष्णु, पूषा, ब्रह्मणस्पति एवं भग को बुलाते हैं. (३)
We call Indra, Agni, Mitra, Varuna, Aditi, Prithvi, Akash, Marudgana, Parvat, Paans, Jal, Vishnu, Pusha, Brahmanaspati and Bhaga for the sake of protection. (3)