हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.55.1

मंडल 5 → सूक्त 55 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 55
प्रय॑ज्यवो म॒रुतो॒ भ्राज॑दृष्टयो बृ॒हद्वयो॑ दधिरे रु॒क्मव॑क्षसः । ईय॑न्ते॒ अश्वैः॑ सु॒यमे॑भिरा॒शुभिः॒ शुभं॑ या॒तामनु॒ रथा॑ अवृत्सत ॥ (१)
अतिशय यज्ञपात्र, प्रकाशित आयुधों वाले एवं सीने पर सोने के हार पहनने वाले मरुद्गण अधिक अन्न धारण करते हैं. वे सरलता से वश में होने योग्य एवं तीव्रगति वाले अश्चों द्वारा वहन किए जाते हैं. मरुतों के रथ जल के पीछे चलते हैं. (१)
The birds who wear atishya yajnapatra, illuminated weapons and wear gold necklaces on the chest wear more food. They are carried by easily controllable and fast moving horses. The chariots of the Maruts run behind the water. (1)