ऋग्वेद (मंडल 5)
हिर॑ण्यरूपमु॒षसो॒ व्यु॑ष्टा॒वयः॑स्थूण॒मुदि॑ता॒ सूर्य॑स्य । आ रो॑हथो वरुण मित्र॒ गर्त॒मत॑श्चक्षाथे॒ अदि॑तिं॒ दितिं॑ च ॥ (८)
हे मित्र एवं वरुण! तुम उषाकाल होने एवं सूर्योदय के पश्चात् अपने लोहे की कीलों वाले स्वर्ण निर्मित रथ में बैठकर चलो. तुम दिति और अदिति दोनों को देखो. (८)
O friend and Varun! You should sit in a golden chariot with your iron nails after dawn and sunrise. You look at both Diti and Aditi. (8)