ऋग्वेद (मंडल 5)
हिर॑ण्यनिर्णि॒गयो॑ अस्य॒ स्थूणा॒ वि भ्रा॑जते दि॒व्य१॒॑श्वाज॑नीव । भ॒द्रे क्षेत्रे॒ निमि॑ता॒ तिल्वि॑ले वा स॒नेम॒ मध्वो॒ अधि॑गर्त्यस्य ॥ (७)
मित्र एवं वरुण का रथ सोने का बना हुआ है. उसके खंभे भी सोने के हैं. वह आकाश में बिजली के समान चमकता है. हम घृत, सोम आदि से सुशोभित यज्ञभूमि में रथ के ऊपर सोमरस स्थापित करें. (७)
The chariot of friend and Varuna is made of gold. His pillars are also gold. He shines like lightning in the sky. We install somras on top of the chariot in the yajnabhoomi adorned with ghrit, som etc. (7)