हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.71.1

मंडल 5 → सूक्त 71 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 71
आ नो॑ गन्तं रिशादसा॒ वरु॑ण॒ मित्र॑ ब॒र्हणा॑ । उपे॒मं चारु॑मध्व॒रम् ॥ (१)
हे शत्रुनाशक एवं शन्रुप्रेरक मित्र व वरुण! तुम हमारे इस अहिंसक यज्ञ में आओ. (१)
O enemies and enemies, inspiring friends and Varuna! You come to this non-violent yagna of ours. (1)