हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.74.2

मंडल 5 → सूक्त 74 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 74
कुह॒ त्या कुह॒ नु श्रु॒ता दि॒वि दे॒वा नास॑त्या । कस्मि॒न्ना य॑तथो॒ जने॒ को वां॑ न॒दीनां॒ सचा॑ ॥ (२)
वे देव अश्विनीकुमार आज कहां हैं? आज वे स्वर्ग में कहां निवास कर रहे हैं? तुम किस यजमान के पास आते हो? कीन तुम्हारी स्तुतियों का सहायक होगा? (२)
Where is that God Ashwinikumar today? Where are they living in heaven today? Which host do you come to? Who will be the helper of your praises? (2)