ऋग्वेद (मंडल 5)
कं या॑थः॒ कं ह॑ गच्छथः॒ कमच्छा॑ युञ्जाथे॒ रथ॑म् । कस्य॒ ब्रह्मा॑णि रण्यथो व॒यं वा॑मुश्मसी॒ष्टये॑ ॥ (३)
हे अश्विनीकुमारो! तुम किस यजमान के प्रति गमन करते हो, किसके पास पहुंचते हो एवं किसके सामने जाने के लिए रथ में घोड़े जोड़े हो? तुम किसकी स्तुतियों से प्रसन्न होते हो? हम तुम्हें पाने की इच्छा करते हैं. (३)
O Ashwinikumaro! To which host do you travel, to whom do you approach, and in front of whom do you have horses added to the chariot to go? Whose praises are you pleased with? We wish to get you. (3)