हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 5.78.6

मंडल 5 → सूक्त 78 → श्लोक 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 5)

ऋग्वेद: | सूक्त: 78
भी॒ताय॒ नाध॑मानाय॒ ऋष॑ये स॒प्तव॑ध्रये । मा॒याभि॑रश्विना यु॒वं वृ॒क्षं सं च॒ वि चा॑चथः ॥ (६)
हे अश्विनीकुमारो! तुम भयभीत एवं प्रार्थना करते हुए सप्तवध्रि ऋषि के छुटकारे के लिए बंद संदूक को खोलो. (६)
O Ashwinikumaro! You open the closed ark for the redemption of sage Saptavadri while you are afraid and praying. (6)