हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.16.25

मंडल 6 → सूक्त 16 → श्लोक 25 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 16
वस्वी॑ ते अग्ने॒ संदृ॑ष्टिरिषय॒ते मर्त्या॑य । ऊर्जो॑ नपाद॒मृत॑स्य ॥ (२५)
हे बलपुत्र एवं मरणरहित अग्नि! तुम्हारा प्रशंसायोग्य तेज यजमान को अन्न देता है. (२५)
O son of strength and a agni without death! Your praiseworthy fast gives food to the host. (25)