हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.45.22

मंडल 6 → सूक्त 45 → श्लोक 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
तद्वो॑ गाय सु॒ते सचा॑ पुरुहू॒ताय॒ सत्व॑ने । शं यद्गवे॒ न शा॒किने॑ ॥ (२२)
हे स्तोताओ! गाय को जैसे घास सुख देती है, उसी प्रकार सोमरस इंद्र को सुखी बनाता है. सोमरस निचुड़ जाने पर यह स्तोत्र बहुतों द्वारा बुलाए गए, शत्रुनाशक एवं दानशील इंद्र के लिए सुखकर होता है. तुम लोग इंद्र को बुलाओ. (२२)
This stotao! Just as grass gives happiness to the cow, so so does Someras make Indra happy. On going to Somras Nichud, this hymn is pleasant for the enemy-destroying and charitable Indra, called by many. You guys call Indra. (22)