हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.45.23

मंडल 6 → सूक्त 45 → श्लोक 23 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 45
न घा॒ वसु॒र्नि य॑मते दा॒नं वाज॑स्य॒ गोम॑तः । यत्सी॒मुप॒ श्रव॒द्गिरः॑ ॥ (२३)
निवासस्थान देने वाले इंद्र तब हमें अनेक गायों सहित अन्न देते हैं, जब वे हमारी स्तुतियां सुनते हैं. (२३)
Indra, who gives us the abode, then gives us food along with many cows when he hears our praises. (23)