हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.51.13

मंडल 6 → सूक्त 51 → श्लोक 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
अप॒ त्यं वृ॑जि॒नं रि॒पुं स्ते॒नम॑ग्ने दुरा॒ध्य॑म् । द॒वि॒ष्ठम॑स्य सत्पते कृ॒धी सु॒गम् ॥ (१३)
हे सज्जनों के रक्षक अग्नि! तुम कुटिल, पापकारी, दुःखदायी एवं कष्ट से वश में आने वाले शत्रु को हमसे दूर करो एवं हमें सुख दो. (१३)
O agni the protector of the gentlemen! You remove from us the evil, the sinful, the grieving and the afflicting enemy and make us happy. (13)