हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.51.14

मंडल 6 → सूक्त 51 → श्लोक 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 51
ग्रावा॑णः सोम नो॒ हि कं॑ सखित्व॒नाय॑ वाव॒शुः । ज॒ही न्य१॒॑त्रिणं॑ प॒णिं वृको॒ हि षः ॥ (१४)
हे सोम! हमारे पत्थर तुम्हारी मित्रता की अभिलाषा करते हैं. तुम अधिक खाने वाले पणि को मारो. वह निश्चय ही बुरा है. (१४)
Hey Mon! Our stones desire your friendship. You kill the over-eating pany. He's definitely bad. (14)