हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.60.1

मंडल 6 → सूक्त 60 → श्लोक 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 60
श्नथ॑द्वृ॒त्रमु॒त स॑नोति॒ वाज॒मिन्द्रा॒ यो अ॒ग्नी सहु॑री सप॒र्यात् । इ॒र॒ज्यन्ता॑ वस॒व्य॑स्य॒ भूरेः॒ सह॑स्तमा॒ सह॑सा वाज॒यन्ता॑ ॥ (१)
वे लोग शत्रु को मारते हैं एवं अन्न प्राप्त करते हैं जो लोग शत्रुपराभवकर्ता इंद्र एवं अग्नि की सेवा करते हैं, वे विशाल धन के स्वामी एवं बल से शत्रुओं को बुरी तरह हराने वाले हैं. (१)
Those who kill the enemy and get food, those who serve the enemy, the defeators Indra and Agni, are the masters of huge wealth and those who defeat the enemies badly with force. (1)