हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.63.8

मंडल 6 → सूक्त 63 → श्लोक 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 63
पु॒रु हि वां॑ पुरुभुजा दे॒ष्णं धे॒नुं न॒ इषं॑ पिन्वत॒मस॑क्राम् । स्तुत॑श्च वां माध्वी सुष्टु॒तिश्च॒ रसा॑श्च॒ ये वा॒मनु॑ रा॒तिमग्म॑न् ॥ (८)
हे बहुतों का पालन करने वाले अश्विनीकुमारो! तुम्हारा धन बहुत है. हमें दूसरों के पास न जाने वाली तथा प्रसन्न करने वाली गाय एवं अन्न दो. हे प्रमुदित होने वाले आश्विनीकुमारो! स्तोता, स्तुतियां एवं तुम्हारे दान के उद्देश्य से तैयार किया जाने वाला सोमरस तुम्हारे लिए है. (८)
O ashwinikumaro who follows many! Yours is a lot of money. Give us a cow and food that does not go to others and pleases us. O merry-to-be-inspiring Ashvinikumaro! The somras, which is prepared for the purpose of hymns, hymns and your charity, is for you. (8)