हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.64.2

मंडल 6 → सूक्त 64 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
भ॒द्रा द॑दृक्ष उर्वि॒या वि भा॒स्युत्ते॑ शो॒चिर्भा॒नवो॒ द्याम॑पप्तन् । आ॒विर्वक्षः॑ कृणुषे शु॒म्भमा॒नोषो॑ देवि॒ रोच॑माना॒ महो॑भिः ॥ (२)
हे देवी उषा! तुम कल्याणी जान पड़ती हो एवं विस्तीर्ण होकर शोभा पा रही हो. तुम्हारी चमकीली किरणें आकाश से गिर रही हैं. तुम महान्‌ तेजों से सुशोभित एवं दीप्त होकर अपना रूप प्रकट करती हो. (२)
O Goddess Usha! You look like a kalyani and are getting adorned with detail. Your bright rays are falling from the sky. You manifest your form by being adorned and illuminated by great radiances. (2)