हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
उदु॑ श्रि॒य उ॒षसो॒ रोच॑माना॒ अस्थु॑र॒पां नोर्मयो॒ रुश॑न्तः । कृ॒णोति॒ विश्वा॑ सु॒पथा॑ सु॒गान्यभू॑दु॒ वस्वी॒ दक्षि॑णा म॒घोनी॑ ॥ (१)
चमकती हुई व शुक्लवर्ण वाली उषाएं शोभा के लिए पानी की लहरों के समान उठती हैं. धन की स्वामिनी, प्रशंसा योग्य एवं समृद्ध करने वाली उषा सभी स्थानों को सुंदरमार्ग वाला एवं सुगम बनाती है. (१)
The shining and shukla-coloured ushas rise like waves of water for shobha. Usha, the master of wealth, admired and enriched, makes all places beautiful and easy to live. (1)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
भ॒द्रा द॑दृक्ष उर्वि॒या वि भा॒स्युत्ते॑ शो॒चिर्भा॒नवो॒ द्याम॑पप्तन् । आ॒विर्वक्षः॑ कृणुषे शु॒म्भमा॒नोषो॑ देवि॒ रोच॑माना॒ महो॑भिः ॥ (२)
हे देवी उषा! तुम कल्याणी जान पड़ती हो एवं विस्तीर्ण होकर शोभा पा रही हो. तुम्हारी चमकीली किरणें आकाश से गिर रही हैं. तुम महान्‌ तेजों से सुशोभित एवं दीप्त होकर अपना रूप प्रकट करती हो. (२)
O Goddess Usha! You look like a kalyani and are getting adorned with detail. Your bright rays are falling from the sky. You manifest your form by being adorned and illuminated by great radiances. (2)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
वह॑न्ति सीमरु॒णासो॒ रुश॑न्तो॒ गावः॑ सु॒भगा॑मुर्वि॒या प्र॑था॒नाम् । अपे॑जते॒ शूरो॒ अस्ते॑व॒ शत्रू॒न्बाध॑ते॒ तमो॑ अजि॒रो न वोळ्हा॑ ॥ (३)
लाल रंग की एवं चमकीली किरणें सुभगा, विस्तृत एवं उत्तम उषा को वहन करती हैं. जिस प्रकार अस्त्र फेंकने वाला शूर शत्रुओं को दूर भगाता है, उसी प्रकार उषा अंधकार को भगाती है तथा शीघ्रगामी सेनापति के समान अंधेरे को रोकती है. (३)
The red and bright rays carry the beautiful, wide and exquisite Usha. Just as the weapon-thrower shrew away the enemy, Usha drives away the darkness and stops the darkness like the quick-moving general. (3)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
सु॒गोत ते॑ सु॒पथा॒ पर्व॑तेष्ववा॒ते अ॒पस्त॑रसि स्वभानो । सा न॒ आ व॑ह पृथुयामन्नृष्वे र॒यिं दि॑वो दुहितरिष॒यध्यै॑ ॥ (४)
हे उषा देवी! पहाड़ एवं बिना हवा वाले स्थान तुम्हारे लिए सुगम एवं सरल मार्ग वाले हों. हे स्वयंप्रकाश वाली उषा! तुम अंतरिक्ष को पार करती हो. विशाल रथवाली, दर्शनीय एवं स्वर्ग की पुत्री उषा हमें अभिलाषा करने योग्य धन दें. (४)
O Usha Devi! Let the mountains and the places without wind be easy and easy for you. O self-lighted Usha! You cross the space. May us give us money to aspire, with a huge chariot, a sight-seeing and the daughter of heaven. (4)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
सा व॑ह॒ योक्षभि॒रवा॒तोषो॒ वरं॒ वह॑सि॒ जोष॒मनु॑ । त्वं दि॑वो दुहित॒र्या ह॑ दे॒वी पू॒र्वहू॑तौ मं॒हना॑ दर्श॒ता भूः॑ ॥ (५)
हे उषा! तुम बिना विराम लिए घोड़ों की सहायता से स्तोताओं के लिए प्रेमपूर्वक धन ढोती हो. हे स्वर्गपुत्री उषा देवी! तुम प्रथम आह्वान में पूजा के योग्य एवं दर्शनीय बनो. (५)
Oh, Usha! You carry money lovingly for the psalms with the help of horses without taking a break. O goddess of heaven! Be worthy of worship and visible in the first call. (5)

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
उत्ते॒ वय॑श्चिद्वस॒तेर॑पप्त॒न्नर॑श्च॒ ये पि॑तु॒भाजो॒ व्यु॑ष्टौ । अ॒मा स॒ते व॑हसि॒ भूरि॑ वा॒ममुषो॑ देवि दा॒शुषे॒ मर्त्या॑य ॥ (६)
हे उषा देवी! तुम्हारे प्रकट होने पर चिड़ियां अपने घोंसलों से उड़ती हैं एवं अन्न पैदा करने वाले मनुष्य अपने घरों से निकलते हैं. तुम अपने समीपवर्ती एवं हव्यदाता मनुष्य को बहुत धन देती हो. (६)
O Usha Devi! When you appear, the birds fly out of their nests, and the people who produce food come out of their homes. You give a lot of money to the man near you and to the possessor. (6)