हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 6.64.3

मंडल 6 → सूक्त 64 → श्लोक 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 6)

ऋग्वेद: | सूक्त: 64
वह॑न्ति सीमरु॒णासो॒ रुश॑न्तो॒ गावः॑ सु॒भगा॑मुर्वि॒या प्र॑था॒नाम् । अपे॑जते॒ शूरो॒ अस्ते॑व॒ शत्रू॒न्बाध॑ते॒ तमो॑ अजि॒रो न वोळ्हा॑ ॥ (३)
लाल रंग की एवं चमकीली किरणें सुभगा, विस्तृत एवं उत्तम उषा को वहन करती हैं. जिस प्रकार अस्त्र फेंकने वाला शूर शत्रुओं को दूर भगाता है, उसी प्रकार उषा अंधकार को भगाती है तथा शीघ्रगामी सेनापति के समान अंधेरे को रोकती है. (३)
The red and bright rays carry the beautiful, wide and exquisite Usha. Just as the weapon-thrower shrew away the enemy, Usha drives away the darkness and stops the darkness like the quick-moving general. (3)