ऋग्वेद (मंडल 6)
सु॒गोत ते॑ सु॒पथा॒ पर्व॑तेष्ववा॒ते अ॒पस्त॑रसि स्वभानो । सा न॒ आ व॑ह पृथुयामन्नृष्वे र॒यिं दि॑वो दुहितरिष॒यध्यै॑ ॥ (४)
हे उषा देवी! पहाड़ एवं बिना हवा वाले स्थान तुम्हारे लिए सुगम एवं सरल मार्ग वाले हों. हे स्वयंप्रकाश वाली उषा! तुम अंतरिक्ष को पार करती हो. विशाल रथवाली, दर्शनीय एवं स्वर्ग की पुत्री उषा हमें अभिलाषा करने योग्य धन दें. (४)
O Usha Devi! Let the mountains and the places without wind be easy and easy for you. O self-lighted Usha! You cross the space. May us give us money to aspire, with a huge chariot, a sight-seeing and the daughter of heaven. (4)